1
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बाळांचा संग टाळणे
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मूर्ख, अज्ञानी व्यक्तींपासून दूर राहणे
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2
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पंडितांचा संग करणे
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ज्ञानी, सद्गुणी व्यक्तींशी मैत्री
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3
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पूज्यांची पूजा करणे
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सत्पुरुष, गुरु, पालक इ. पूजनीयांची सेवा
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4
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योग्य प्रदेशात वास्तव्य
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चांगल्या ठिकाणी राहणे (सुसंस्कृत समाज)
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5
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पूर्वसंचित पुण्य
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पूर्वी केलेल्या चांगल्या कर्मांचे फल
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6
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स्वतःला योग्य रीतीने घडवणे
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आत्मविकासासाठी प्रयत्न करणे
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7
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विद्या व कला शिकणे
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शिक्षण, कौशल्य प्राप्त करणे
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8
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नीती व संयम पाळणे
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शिस्तबद्ध वर्तन व चारित्र्य
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9
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मधुर वाणी बोलणे
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गोड, सत्य व हितकारी बोलणे
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10
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आई-वडिलांची सेवा
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माता-पित्याचे ऋण फेडणे
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11
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कुटुंबाचा पालनपोषण
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घरासाठी जबाबदारीने काम करणे
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12
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अहिंसात्मक व निंदा टाळणे
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वाईट कृत्ये टाळणे
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13
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दान करणे
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गरजूंसाठी दयाळूपणाने दान
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14
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धर्मानुसार आचरण
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धर्मानुसार (धम्म) जीवन जगणे
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15
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नातेसंबंध जपणे
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संबंध टिकवण्यासाठी सहकार्य
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16
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चुकीपासून दूर राहणे
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पापकर्म, दुष्कर्म टाळणे
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17
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मद्य व नशा न करणे
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व्यसने टाळणे
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18
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सतत दक्ष राहणे
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सजग, सावध असणे
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19
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नम्र असणे
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गर्व न ठेवता विनम्र राहणे
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20
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कृतज्ञ असणे
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उपकार मानणे, आभार मानणे
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21
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योग्य वेळी धम्म ऐकणे
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धम्म शिकवणी ऐकणे आणि समजून घेणे
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22
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संयम पाळणे
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विषयांवर ताबा ठेवणे
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23
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पवित्र जीवन जगणे
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शुद्ध आचारविचार व आचरण
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24
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चार आर्य सत्य जाणणे
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दु:ख, कारण, निरोध व मार्ग समजणे
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25
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निर्वाणाची अनुभूती
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सर्व बंधनांपासून मुक्त होणे
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26
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दुःखात खचून न जाणे
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संकटातही मन शांत ठेवणे
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27
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चित्त स्थिर ठेवणे
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मन हलवू न देता समत्व राखणे
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28
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शोकहीन व निर्मोही राहणे
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राग, शोक, मोह नष्ट करणे
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29
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अंतर्मुख असणे
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बाह्य आकर्षणांपासून अलिप्त राहणे
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30
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निष्कलंक व पवित्र जीवन
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दोषरहित, निर्मळ वृत्ती
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31
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नियमित ध्यान करणे
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अंतर्मनाचा अभ्यास व शांतता
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32
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चित्ताची शुद्धता
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मानसिक मैल नष्ट करणे
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33
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अष्टांगिक मार्गाचे पालन
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सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी इ. आठ अंग
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34
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लोभ-मोहाचा त्याग
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आसक्ती टाळणे
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35
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धर्मात दृढ श्रद्धा
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बुद्ध, धम्म, संघावर विश्वास
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36
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सत्कर्म करणे
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सतत शुभकर्म करणे
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37
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कोठेही अपयश न येणे
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कोणत्याही परिस्थितीत न हारणे
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38
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सर्वत्र सुख आणि शांतता
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अंतिम मंगल — निर्वाण, परिपूर्ण कल्याण
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