एल्गार परीषद- भीमा कोरेगाव खटला हे एक षड्यंत्र आहे याचा ढळढळीत पुरावा..

एल्गार परीषद- भीमा कोरेगाव खटला हे एक षड्यंत्र आहे याचा ढळढळीत पुरावा..

Washingtonpost या वृत्तपत्राने नुकत्याच दिलेल्या बातमीनुसार, एल्गार परिषद-भीमा कोरेगाव खटल्यातील बंदी व मानवधिकार कार्यकर्ते रोना विल्सन यांच्या कंप्युटर मध्ये अनेक गोष्टी plant करण्यात आल्या होत्या. आर्सेनल कंसलटिंग नावाच्या कंपनीने आपला तपशीलवार अहवाल या संदर्भात दिला आहे.
बातमीची लिंक सोबत जोडत आहोत.

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगाव खटल्यातील सर्व बंदयांची तत्काळ बिनशर्त मुक्तता करण्यात यावी ✊✊✊

Source: Facebook wall of Dr. Sangram Patil

हिंदी अनुवाद.

( रोना विल्सन के कंप्यूटर से निकली चिट्ठियों का सच )

सबको पता होगा और झूठ में यकीन करने वालों को तो शर्तिया पता होगा कि भीमा-कोरेगाव में हिंसा की जांच करते हुये एजेंसियों ने रोना विल्सन के लैपटॉप में कुछ ऐसी चिट्ठियाँ पाईं थी जिनमें, एजेंसियों के अनुसार, सरकार गिराने की हरसत लिखी थी. और उसमें कई सारे नाम लिखे थे जो बुद्धिजीवियों के थे और उनके इस साजिश में शामिल होने की बात भी लिखी थी.

वाशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट की माने तो एक डिजिटल फोरेंसिक फर्म, आर्सेनल कंसल्टिंग, ने रोना विल्सन के कम्यूटर की इलेक्ट्रोनिक प्रति की जाँच किया और पाया कि उनकी गिरफ्तारी के ठीक पहले किसी बदमाश ने मैलवेयर के जरिये दस चिट्ठियाँ उनके सिस्टम में प्लांट कर दी थी. यह तो कभी जांच का विषय भी नहीं बनेगा कि वह बदमाश सत्ता में किसके करीब था लेकिन तथ्य यही है कि रोना विल्सन के सिस्टम में मिली वे चिट्ठियाँ प्रत्यारोपित थीं.

उन चिट्ठियों के आधार पर न जाने कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें किस हद तक की यातना पहुँचाई गई. सोलह बेहतरीन लोग गिरफ्तार हुये और वे अब भी कैद में हैं.

आर्सेनल फोरेंसिक ने उस सायबर हमले को जून 2016 की एक दोपहर में घटित हुआ बताया है.उस दोपहर विल्सन के एक परिचित कार्यकर्ता ने कई सारे मेल भेजे और उन्हें फोन कर एक सन्देश से कुछ डाउनलोड करने को कहा. उस दुर्भाग्यशाली लिंक पर ‘नेटवायर’ नामक वायरस इंस्टाल हो गया. उसके बाद जो हुआ वह डरा देने वाला है.

इस मेलवेयर ने विल्सन के सिस्टम का कीबोर्ड, पासवर्ड, ब्राऊजिंग गतिविधियों पर कब्जा जमा लिया. सायबर हमलावर ने फिर उस कम्प्यूटर में एक छुपा हुआ फोल्डर बनाया और कम से कम दस चिट्ठियाँ उसमें रख दीं.

कानूनी जांच कर रही एजेंसियों से इतनी निरपेक्षता की उम्मीद नहीं थी इसलिए नहीं मालूम चला लेकिन आर्सेनल ने बताया है कि एमएस वर्ड के जिस वर्जन में वह चिट्ठियाँ लिखी गई हैं वह वर्जन विल्सन के सिस्टम में रहा ही नहीं है. साथ ही आर्सेनल को कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे जाहिर हो कि वह चिट्ठियाँ उस कम्प्यूटर में कभी खुली हों. यानी रोना विल्सन ने वह चिट्ठियाँ बिना फाइल खोले ही लिख दिया है.

आर्सेनल के कर्ता धर्ता स्पेंसर ने इस पूरे हमले को ‘वेरी आर्गनाइज्ड’ और ‘एक्स्ट्रीमली डार्क’ बताया है और यह भी बताया है कि दहला देने वाला यह मामला अपने आप में अनूठा है और उन्होंने कभी कोई मामला इस अंदाज में किसी के कम्यूटर में सबूत प्लांट करने का नहीं देखा था. यह भी कि विल्सन उस सायबर अपराधी के अकेले शिकार नहीं हैं. उनके कई साथियों के साथ यह अपराध उसने किया है. यही नहीं, जिन लोगों ने विल्सन के साथियों की मदद करनी चाही उनके सिस्टम पर पेगासस का हमला आपको याद ही होगा.

चकित करने वाली बात यह होगी कि आर्सेनल की इस रिपोर्ट को उन्हीं के सामने मुश्किल से मिले प्राणवायु की तरह रखना है जिन्हें सब कुछ पहले से पता है.

रिपोर्ट इस लिंक पर:
https://t.co/XbvlJmTxcm

https://www.washingtonpost.com/world/asia_pacific/india-bhima-koregaon-activists-jailed/2021/02/10/8087f172-61e0-11eb-a177-7765f29a9524_story.html

Leave a Comment

Your email address will not be published.