सॉन्ग – भीमराज की बेटी
सिंगर – शकुंतला जाधव
म्युझिक – अशोक वैगणकर
लिरिक्स – प्रतापसिंग बोदडे
उमर मे बाली भोलीं भाली शील की झोली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
कितनी ही छोटी हू मे गुणवान की बेटी हू मे
प्रेम का रस बरसावू ऐसे प्रेम की बोली हू
अजी भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
मे हरदम हस्ती रहु हर दिल मे बस्ती रहु
बुद्ध धम्म की गुलशन की मी वो हरियली हू
अजी भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
दुष्मन भी मुझसे डरे गर टकरये तो मरे
चिरती है दुष्मन का सीना में वो गोली हू
अजी भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
क्या नाम पता क्या मेरा सून प्रतापसिंग तू जरा
नागपूर की पेहली पेहर मे निली निली हू
अजी भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
उमर मे बाली भोलीं भाली शील की झोली हू
भिमराज की बेटी मे तो जयभीम वाली हू
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